विक्रम और बेताल भाग 2 - मौन की प्रतिज्ञा | The Vikram-Betaal story in Hindi
विक्रम और बेताल भाग 2 - मौन की प्रतिज्ञा
राजा विक्रम और बेताल जंगल में अपनी यात्रा जारी रखते हैं। वे एक जगह पर आते हैं जहाँ एक पेड़ के नीचे एक शीशम का ताबूत रखा हुआ है। बेताल ने कहा, "यह ताबूत एक राजकुमार का है। वह एक जादूगर द्वारा शाप दिया गया था, और अब वह एक प्रेत बन गया है।"विक्रम ने कहा, "मैं इस प्रेत को मुक्त करूंगा।"बेताल ने कहा, "तुम ऐसा नहीं कर सकते। अगर तुम ताबूत खोलोगे, तो प्रेत तुम पर हमला करेगा और तुम्हें मार डालेगा।"
विक्रम ने कहा, "मैं डरता नहीं। मैं इस प्रेत को मुक्त करूंगा, चाहे कुछ भी हो जाए।"विक्रम ने ताबूत खोला, और प्रेत बाहर निकल आया। प्रेत बहुत भयानक था, और विक्रम को डर लग रहा था। लेकिन विक्रम ने साहस किया और प्रेत से कहा, "मैं तुम्हें मुक्त कर रहा हूँ। अब जाओ और अपना जीवन जियो।"
प्रेत ने विक्रम को धन्यवाद दिया और चला गया। विक्रम खुश था कि उसने प्रेत को मुक्त कर दिया था।
बेताल ने कहा, "तुमने बहुत अच्छा काम किया, राजा। तुम एक सच्चे नायक हो।"विक्रम ने कहा, "तुम भी एक अच्छे दोस्त हो, बेताल। मैं तुम्हारी मदद के लिए हमेशा आभारी रहूँगा।"
विक्रम और बेताल अपनी यात्रा जारी रखते हैं। वे कई और चुनौतियों का सामना करते हैं, लेकिन वे हमेशा एक साथ मिलकर उनका सामना करते हैं। वे एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त बन जाते हैं, और उनका बंधन कभी नहीं टूटता।



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